रायपुर. शासन को आधी-अधूरी व भ्रामक जानकारी देकर फर्जीवाड़ा करने का एक नया मामला सामने आया है. जिसमें एक शिक्षाकर्मी ने शासकीय सेवा में रहते हुए न सिर्फ एमटेक व एमफिल की नियमित पढ़ाई कर ली, बल्कि खुद को गरीब बताकर शासन की छात्रवृत्ति भी हथिया ली. यह पूरा फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका और अब यही शिक्षाकर्मी संदिग्ध जानकारियों के आधार पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से पीएचडी के लिए जोड़-तोड़ कर रहा है. यह पूरा मामला शासकीय प्यारेलाल हिंदू हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षाकर्मी वर्ग-एक निलेश कुमार देवांगन का हैं. जिसके फर्जीवाड़े की शुरुआत वर्ष 2009 से हुई. उस वक्त यह शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ था, लेकिन पं. रविशंकर शुक्ल विवि के इलेक्ट्रानिक्स विभाग में एमटेक कोर्स में दाखिले के दौरान इसने शिक्षाकर्मी होने की बात को छुपाकर नियमित कोर्स में दाखिला ले लिया. एमटेक प्रवेश के आवेदन पत्र में नौकरी संबंधी कॉलम-11 में जानकारी निरंक रखी गई है. इससे साबित होता है कि इसने शिक्षाकर्मी होने की बात को छुपा कर कोर्स में प्रवेश लिया. कोई भी शासकीय सेवक विभागीय अनुमति और शैक्षणिक अवकाश लिए बिना नियमित पढ़ाई नहीं कर सकता, जबकि उसने नियमित पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं लिया था. इतना ही नहीं इसी दौरान वह सेंट्रल कालेज फाफाडीह में अंशकालीन प्राध्यापक के रूप में अध्यापन का कार्य भी कर रहा था. वहां का समय सुबह 8 से 11 बजे कर था. इसके बाद सुबह 11 से शाम पांच बजे तक स्कूल का समय रहता है, उसी दौरान सुबह 10.30 से शाम पांच बजे तक एमटेक की कक्षाएं भी लगती थी. उसने एक ही समय में अध्ययन और दो-दो जगह अध्यापन का कार्य कैसे निपटा लिया, इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. इस मामले में इलेक्ट्रानिक्स विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं. बताया जा रहा है कि निलेश कुमार देवांगन ने 2011 में एमफिल इलेक्ट्रानिक्स में प्रवेश लिया. एमफिल पाठ्यक्रम के लिए कक्षा में 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है. इस दौरान यह शासकीय प्यारेलाल हिंदू हाई स्कूल में शिक्षाकर्मी के पद पर कार्यरत था. ऐसे में उसने कब 80 प्रतिशत कक्षाएं नियमित रूप से कर लीं. इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस दौरान स्कूल और विवि दोनों जगहों पर इसकी उपस्थिति दर्शायी गई है.
नियमित पढ़ाई की अनुमति नहीं
एमटेक कोर्स के दौरान श्री देवांगन ने शिक्षा अधिकारी नगर निगम रायपुुर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया थौ, जिसमें उसे शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ बताया गया है. इस अनापत्ति प्रमाणपत्र के अनुसार उसे केवल परीक्षा में शाम्मिलित होने की अनुमति दी गई है. अनापत्ति प्रमाणपत्र से साफ है कि उसे नियमित पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया गया है. अनापत्ति प्रमाणपत्र इस शर्त पर दिया गया कि उसे किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जा रहा है और न ही उसके इस कार्य से शिक्षकीय कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होनी चाहिए.
पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़
निलेश कुमार देवांगन अब इलेक्ट्रानिक्स विभाग से पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़ में लगा हुआ है. उसने 2013 में पीएचडी पाठ्यक्रम की पंजीयन के लिए आवेदन किया है. आवेदन पत्र में क्र.-5 पर नौकरी-व्यावसाय के कॉलम में श्री देवांगन ने अपने आप को सहायक प्राध्यापक सीसीआईटी (सेंट्रल कॉलेज आॅफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी) के पद पर कार्यरत बताया है. इस संबंध में उन्होंने कॉलेज का एनओसी भी प्रस्तुत किया है. इसके लिए उसने अभी तक विभागीय अनुमति नहीं ली है.
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Details Navbharat Press
Saturday, 24 May 2014 00:37
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नियमित पढ़ाई की अनुमति नहीं
एमटेक कोर्स के दौरान श्री देवांगन ने शिक्षा अधिकारी नगर निगम रायपुुर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया थौ, जिसमें उसे शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ बताया गया है. इस अनापत्ति प्रमाणपत्र के अनुसार उसे केवल परीक्षा में शाम्मिलित होने की अनुमति दी गई है. अनापत्ति प्रमाणपत्र से साफ है कि उसे नियमित पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया गया है. अनापत्ति प्रमाणपत्र इस शर्त पर दिया गया कि उसे किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जा रहा है और न ही उसके इस कार्य से शिक्षकीय कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होनी चाहिए.
पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़
निलेश कुमार देवांगन अब इलेक्ट्रानिक्स विभाग से पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़ में लगा हुआ है. उसने 2013 में पीएचडी पाठ्यक्रम की पंजीयन के लिए आवेदन किया है. आवेदन पत्र में क्र.-5 पर नौकरी-व्यावसाय के कॉलम में श्री देवांगन ने अपने आप को सहायक प्राध्यापक सीसीआईटी (सेंट्रल कॉलेज आॅफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी) के पद पर कार्यरत बताया है. इस संबंध में उन्होंने कॉलेज का एनओसी भी प्रस्तुत किया है. इसके लिए उसने अभी तक विभागीय अनुमति नहीं ली है.
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रायपुर.
शासन को आधी-अधूरी व भ्रामक जानकारी देकर फर्जीवाड़ा करने का एक नया मामला
सामने आया है. जिसमें एक शिक्षाकर्मी ने शासकीय सेवा में रहते हुए न सिर्फ
एमटेक व एमफिल की नियमित पढ़ाई कर ली, बल्कि खुद को गरीब बताकर शासन की
छात्रवृत्ति भी हथिया ली. यह पूरा फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका और अब यही
शिक्षाकर्मी संदिग्ध जानकारियों के आधार पर पं. रविशंकर शुक्ल
विश्वविद्यालय से पीएचडी के लिए जोड़-तोड़ कर रहा है. यह पूरा मामला शासकीय
प्यारेलाल हिंदू हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षाकर्मी वर्ग-एक निलेश कुमार
देवांगन का हैं. जिसके फर्जीवाड़े की शुरुआत वर्ष 2009 से हुई. उस वक्त यह
शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ था,
लेकिन पं. रविशंकर शुक्ल विवि के इलेक्ट्रानिक्स विभाग में एमटेक कोर्स में
दाखिले के दौरान इसने शिक्षाकर्मी होने की बात को छुपाकर नियमित कोर्स में
दाखिला ले लिया. एमटेक प्रवेश के आवेदन पत्र में नौकरी संबंधी कॉलम-11 में
जानकारी निरंक रखी गई है. इससे साबित होता है कि इसने शिक्षाकर्मी होने की
बात को छुपा कर कोर्स में प्रवेश लिया. कोई भी शासकीय सेवक विभागीय अनुमति
और शैक्षणिक अवकाश लिए बिना नियमित पढ़ाई नहीं कर सकता, जबकि उसने नियमित
पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं लिया था. इतना ही नहीं इसी दौरान वह
सेंट्रल कालेज फाफाडीह में अंशकालीन प्राध्यापक के रूप में अध्यापन का
कार्य भी कर रहा था. वहां का समय सुबह 8 से 11 बजे कर था. इसके बाद सुबह 11
से शाम पांच बजे तक स्कूल का समय रहता है, उसी दौरान सुबह 10.30 से शाम
पांच बजे तक एमटेक की कक्षाएं भी लगती थी. उसने एक ही समय में अध्ययन और
दो-दो जगह अध्यापन का कार्य कैसे निपटा लिया, इसे लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
इस मामले में इलेक्ट्रानिक्स विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष की भूमिका भी
संदेह के घेरे में हैं. बताया जा रहा है कि निलेश कुमार देवांगन ने 2011
में एमफिल इलेक्ट्रानिक्स में प्रवेश लिया. एमफिल पाठ्यक्रम के लिए कक्षा
में 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है. इस दौरान यह शासकीय प्यारेलाल हिंदू
हाई स्कूल में शिक्षाकर्मी के पद पर कार्यरत था. ऐसे में उसने कब 80
प्रतिशत कक्षाएं नियमित रूप से कर लीं. इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
बताया जा रहा है कि इस दौरान स्कूल और विवि दोनों जगहों पर इसकी उपस्थिति
दर्शायी गई है.
नियमित पढ़ाई की अनुमति नहीं
एमटेक कोर्स के दौरान श्री देवांगन ने शिक्षा अधिकारी नगर निगम रायपुुर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया थौ, जिसमें उसे शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ बताया गया है. इस अनापत्ति प्रमाणपत्र के अनुसार उसे केवल परीक्षा में शाम्मिलित होने की अनुमति दी गई है. अनापत्ति प्रमाणपत्र से साफ है कि उसे नियमित पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया गया है. अनापत्ति प्रमाणपत्र इस शर्त पर दिया गया कि उसे किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जा रहा है और न ही उसके इस कार्य से शिक्षकीय कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होनी चाहिए.
पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़
निलेश कुमार देवांगन अब इलेक्ट्रानिक्स विभाग से पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़ में लगा हुआ है. उसने 2013 में पीएचडी पाठ्यक्रम की पंजीयन के लिए आवेदन किया है. आवेदन पत्र में क्र.-5 पर नौकरी-व्यावसाय के कॉलम में श्री देवांगन ने अपने आप को सहायक प्राध्यापक सीसीआईटी (सेंट्रल कॉलेज आॅफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी) के पद पर कार्यरत बताया है. इस संबंध में उन्होंने कॉलेज का एनओसी भी प्रस्तुत किया है. इसके लिए उसने अभी तक विभागीय अनुमति नहीं ली है.
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एमटेक कोर्स के दौरान श्री देवांगन ने शिक्षा अधिकारी नगर निगम रायपुुर द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया थौ, जिसमें उसे शासकीय माध्यमिक शाला खमतराई में शिक्षाकर्मी वर्ग-दो के पद पर पदस्थ बताया गया है. इस अनापत्ति प्रमाणपत्र के अनुसार उसे केवल परीक्षा में शाम्मिलित होने की अनुमति दी गई है. अनापत्ति प्रमाणपत्र से साफ है कि उसे नियमित पढ़ाई के लिए किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया गया है. अनापत्ति प्रमाणपत्र इस शर्त पर दिया गया कि उसे किसी प्रकार का अवकाश नहीं दिया जा रहा है और न ही उसके इस कार्य से शिक्षकीय कार्य में कोई बाधा उत्पन्न होनी चाहिए.
पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़
निलेश कुमार देवांगन अब इलेक्ट्रानिक्स विभाग से पीएचडी के लिए भी जोड़-तोड़ में लगा हुआ है. उसने 2013 में पीएचडी पाठ्यक्रम की पंजीयन के लिए आवेदन किया है. आवेदन पत्र में क्र.-5 पर नौकरी-व्यावसाय के कॉलम में श्री देवांगन ने अपने आप को सहायक प्राध्यापक सीसीआईटी (सेंट्रल कॉलेज आॅफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी) के पद पर कार्यरत बताया है. इस संबंध में उन्होंने कॉलेज का एनओसी भी प्रस्तुत किया है. इसके लिए उसने अभी तक विभागीय अनुमति नहीं ली है.
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